
टेक्सटाइल ऑटोमेशन में UV क्यूरिंग प्रक्रिया को सही तरीके से संचालित करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। UV क्यूरिंग लैंपों को केवल रोशनी के साधनों के रूप में ही नहीं, बल्कि वास्तव में “अंतिम चरण” के रूप में ही देखना चाहिए। यहीं पर चमत्कार होता है – तरल स्याही को कुछ ही सेकंडों में मजबूत, ठोस फिल्म में बदल दिया जाता है। यदि यह प्रक्रिया सही तरीके से न हो, तो पहले किया गया सारा काम व्यर्थ हो जाता है।
ऊर्जा एवं गति से जुड़ी समस्याएँ
चौड़े कपड़ों पर समान रूप से क्यूरिंग प्रक्रिया को पूरा करना कठिन है। इसके लिए निरंतर ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यदि ऊर्जा कम हो जाए, या बेल्ट की गति बहुत अधिक हो जाए, तो क्यूरिंग प्रक्रिया ठीक से नहीं होगी। ऐसी स्थिति में स्याही धुंधली रह जाती है, या बुरी तरह से धोने पर कपड़े से निकल जाती है। हमें वोल्टेज एवं वॉटेज को संतुलित रखने में बहुत समय लगता है, ताकि लैंप सही मात्रा में ऊर्जा दे सके – इतनी ऊर्जा कि स्याही ठीक से जम जाए, लेकिन इतनी अधिक न हो कि कपड़ा नष्ट हो जाए।
काँच का महत्व
हम लैंपों के लिए उच्च शुद्धता वाला फ्यूज्ड क्वार्ट्ज ही उपयोग में लाते हैं। क्यों? क्योंकि सामान्य काँच, लघु-तरंग वाली UV किरणों के लिए बाधा बन जाता है; जबकि क्वार्ट्ज ऐसी किरणों को आसानी से अपने अंदर से गुजरने देता है। लेकिन इसके लिए इन ट्यूबों को हमेशा साफ रखना आवश्यक है। थोड़ी सी भी धूल या स्याही के दाग से “कोल्ड स्पॉट” बन जाता है। ऐसी स्थिति में आपको तब ही पता चलेगा, जब आपके तैयार उत्पाद पर स्याही के दाग दिखेंगे।
गर्मी से निपटना
UV लैंप बहुत गर्म हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में गर्मी को नियंत्रित करना आवश्यक है। यदि ऐसा न किया जाए, तो सिंथेटिक धागे सिकुड़ सकते हैं, या पूरा कपड़ा विकृत हो सकता है। इससे बचने हेतु हम आमतौर पर फोर्स्ड-एयर कूलिंग या ठंडे रोलरों का उपयोग करते हैं, ताकि गर्मी कपड़े से दूर रहे। यदि आपकी कूलिंग प्रणाली लैंप की ऊर्जा को संभाल न पाए, तो कपड़ा नष्ट हो सकता है।
एक और सलाह: यदि आप लैंप बदल रहे हैं, तो उसकी लंबाई एवं पिनों का आकार ठीक होना आवश्यक है। ऐसा न होने पर विद्युत धारा के कारण समस्याएँ हो सकती हैं। साथ ही, ठीक फिट होने से ही किरणें स्याही पर सही जगह पर पड़ेंगी।